भारत ने 1971 में बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजादी दिलाई। तब बाग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था। भारत की सेना ढाका तक पहुंच गई और पाकिस्तानी सेना के जनरल नियाजी को उसके 93 हजार सैनिकों के साथ सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया। पाक आर्मी ने इंडिया ईस्टर्न कमांड के जनरल अरोड़ा के सामने सरेंडर दस्तावेजों पर दस्तखत किया। इस प्रकार बांग्लादेश आजाद हो गया।
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बांग्लादेश की आजादी के बाद बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के नायक और पहले प्रधानमंत्री शेख मुजीबुर रहमान 6 फरवरी 1972 को भारत आए और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का आभार व्यक्त किया।
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बांग्लादेश की मदद में ईस्ट पाकिस्तान(अब बांग्लादेश) पहुंचे इंडियन आर्मी के टैंक के साथ खुशियां जाहिर करते आजादी के समर्थक लोग।
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ईस्ट पाकिस्तान में बिहारी लोग जो 1947 में भारत-पाक बंटवारे के बाद वहां चले गए थे। बांग्लादेश अलग होने के बाद पाकिस्तान को भी छोड़ दिया।
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7 दिसंबर 19971 को ईस्ट पाकिस्तान में मौजूद भारतीय सेना, जब उसे देश की ओर से पाक पर सीधे फायरिंग करने का आदेश मिला।
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7 मार्च 1971 को बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते उसके नेता शेख मुजीबुर रहमान।
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ईस्ट पाकिस्तान के इलाके में डटे बंग्लादेश फ्रीडम आर्मीम के जवान विचरण करते हुए।
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बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के सैनिकों के साथ आजादी का जश्न मनाते लोग
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पाकिस्तानी सैनिकों के खिलाफ और बांग्लादेश के पक्ष में ढाका में मोर्चा संभाले भारतीय सेना के जवान।
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11 जनवरी 1972 को बांग्लादेश के लोगों को संबोधित करते शेख मुजीबुर रहमान।